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राष्ट्रीय

लखनऊ। भारतीय किसान यूनियन आजाद हिंद संगठन के राष्ट्रीय संरक्षक एवं राष्ट्रीय सलाहकार, राज्य से लेकर पीएमओ तक सचिव रहे सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. कमल टावरी आज भारत के एक प्रख्यात प्रशासक, चिंतक और समाजसेवी के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने प्रशासनिक सेवा के साथ-साथ समाज और राष्ट्र निर्माण में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।1968 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रहे डॉ. कमल टावरी ने अपने लंबे प्रशासनिक जीवन में केंद्र और राज्य सरकार के अनेक महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने आराम का रास्ता नहीं चुना, बल्कि अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्रहित के लिए समर्पित कर दिया। उनका स्पष्ट उद्देश्य है — ग्राम स्वराज, आत्मनिर्भर भारत, स्वावलंबी समाज, सशक्त राष्ट्र और समृद्ध भारत का निर्माण।वर्तमान समय में डॉ. कमल टावरी भारतीय किसान यूनियन आजाद हिंद संगठन के राष्ट्रीय संरक्षक एवं राष्ट्रीय सलाहकार के रूप में किसानों, मजदूरों और वंचित वर्गों के हितों के लिए अपने अनुभव और मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।वे देशभर में किसानों, युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करते हैं और उन्हें कृषि, उद्यमिता, कौशल विकास, स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योग तथा स्वरोजगार के अनेक विकल्पों के बारे में जानकारी देते हैं।डॉ. कमल टावरी सहकारिता के माध्यम से समृद्धि के विचार को भी आगे बढ़ा रहे हैं। उनका मानना है कि सहकारिता के माध्यम से प्रत्येक ग्राम में आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है और ग्रामीणों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है।उनका स्पष्ट मानना है कि यदि गांव मजबूत होंगे तो भारत मजबूत होगा। इसी सोच के साथ वे लगातार ग्राम स्वराज की अवधारणा को मजबूत करने, किसानों को संगठित करने और युवाओं को रोजगार के नए अवसरों से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।इसके साथ ही वे शिक्षा और वैश्विक स्तर पर भी सक्रिय हैं। वे Panchgaon University, चेन्नई के वाइस चांसलर के रूप में शिक्षा, शोध और मूल्य आधारित ज्ञान को बढ़ावा दे रहे हैं।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। वे UNACCC में सीनियर एडवाइजर के रूप में कार्य करते हुए विश्व कल्याण, मानवता और सतत विकास से जुड़े विषयों पर अपनी सलाह और अनुभव प्रदान कर रहे हैं।डॉ. कमल टावरी एक प्रख्यात लेखक भी हैं। उन्होंने अब तक लगभग 60 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिनमें राष्ट्र निर्माण, सुशासन, आध्यात्मिक चिंतन, सामाजिक विकास और आत्मनिर्भर भारत जैसे विषयों पर गहन विचार प्रस्तुत किए गए हैं।आज भी वे भारत और विश्व के विभिन्न मंचों पर सक्रिय रहकर किसानों, युवाओं और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास के अवसर पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।डॉ. कमल टावरी का जीवन इस बात का उदाहरण है कि सेवानिवृत्ति अंत नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए नई शुरुआत हो सकती है।अंत में उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे उनके संदेश को आत्मसात करें और एक समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।जय जवान , जय किसान।

ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर भारत के पक्षधर हैं पूर्व आईएएस डॉ. कमल टावरीन्यूज़ मैटर:पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. कमल टावरी देश में ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को मजबूत करने की बात करते हैं। उनका मानना है कि भारत की वास्तविक शक्ति गांवों में बसती है और ग्रामीण समाज के विकास से ही देश का समग्र विकास संभव है।डॉ. टावरी ने अपने प्रशासनिक अनुभव और सामाजिक कार्यों के माध्यम से समाज को जागरूक करने का प्रयास किया है। वे युवाओं को सकारात्मक सोच, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करते हैं।संन्यास ग्रहण करने के बाद स्वामी कमलानंद गिरि के रूप में भी वे समाज, पर्यावरण और ग्रामीण जागरण के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं।

आईएएस (सेवानिवृत्त) डॉ. कमल टावरी: सेना से प्रशासन और फिर अध्यात्म तक प्रेरणादायक सफरन्यूज़ मैटर:भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी डॉ. कमल टावरी का जीवन सेना, प्रशासन और आध्यात्मिक साधना का अनोखा संगम रहा है। उनका जन्म 1 अगस्त 1946 को महाराष्ट्र के वर्धा में हुआ। उन्होंने एलएलबी और अर्थशास्त्र में पीएचडी की शिक्षा प्राप्त की।डॉ. टावरी ने अपने करियर की शुरुआत भारतीय सेना से की और लगभग 6 वर्षों तक सेना में सेवा दी। इसके बाद वे 1968 बैच के आईएएस अधिकारी बने और उत्तर प्रदेश कैडर में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।लगभग 38 वर्षों की प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्होंने जिलाधिकारी, मंडलायुक्त, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव और केंद्र सरकार में योजना आयोग के सलाहकार जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले।सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने सामाजिक, बौद्धिक और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में कार्य जारी रखा। वर्ष 2022 में बद्रीनाथ धाम में संन्यास ग्रहण करने के बाद उनका नाम स्वामी कमलानंद गिरि हो गया। वर्तमान में वे आध्यात्मिक साधना, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण समाज जागरण में सक्रिय हैं।

शंकरगढ़ में हत्या का खुलासा, पुलिस ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तारप्रयागराज / भारत लाइव टीवी न्यूजप्रयागराज के शंकरगढ़ थाना क्षेत्र में हुई हत्या के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।जानकारी के अनुसार, 17 फरवरी को हुई वारदात के बाद शव को जंगल में फेंक दिया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू की और संदिग्धों से पूछताछ की।जांच के दौरान पुलिस को अहम सुराग मिले, जिसके आधार पर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और मामले से जुड़ी अन्य जानकारी भी जुटाई जा रही है।पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

अंतर्राष्ट्रीय

लखनऊ। भारतीय किसान यूनियन आजाद हिंद संगठन के राष्ट्रीय संरक्षक एवं राष्ट्रीय सलाहकार, राज्य से लेकर पीएमओ तक सचिव रहे सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. कमल टावरी आज भारत के एक प्रख्यात प्रशासक, चिंतक और समाजसेवी के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने प्रशासनिक सेवा के साथ-साथ समाज और राष्ट्र निर्माण में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।1968 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रहे डॉ. कमल टावरी ने अपने लंबे प्रशासनिक जीवन में केंद्र और राज्य सरकार के अनेक महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने आराम का रास्ता नहीं चुना, बल्कि अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्रहित के लिए समर्पित कर दिया। उनका स्पष्ट उद्देश्य है — ग्राम स्वराज, आत्मनिर्भर भारत, स्वावलंबी समाज, सशक्त राष्ट्र और समृद्ध भारत का निर्माण।वर्तमान समय में डॉ. कमल टावरी भारतीय किसान यूनियन आजाद हिंद संगठन के राष्ट्रीय संरक्षक एवं राष्ट्रीय सलाहकार के रूप में किसानों, मजदूरों और वंचित वर्गों के हितों के लिए अपने अनुभव और मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।वे देशभर में किसानों, युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करते हैं और उन्हें कृषि, उद्यमिता, कौशल विकास, स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योग तथा स्वरोजगार के अनेक विकल्पों के बारे में जानकारी देते हैं।डॉ. कमल टावरी सहकारिता के माध्यम से समृद्धि के विचार को भी आगे बढ़ा रहे हैं। उनका मानना है कि सहकारिता के माध्यम से प्रत्येक ग्राम में आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है और ग्रामीणों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है।उनका स्पष्ट मानना है कि यदि गांव मजबूत होंगे तो भारत मजबूत होगा। इसी सोच के साथ वे लगातार ग्राम स्वराज की अवधारणा को मजबूत करने, किसानों को संगठित करने और युवाओं को रोजगार के नए अवसरों से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।इसके साथ ही वे शिक्षा और वैश्विक स्तर पर भी सक्रिय हैं। वे Panchgaon University, चेन्नई के वाइस चांसलर के रूप में शिक्षा, शोध और मूल्य आधारित ज्ञान को बढ़ावा दे रहे हैं।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। वे UNACCC में सीनियर एडवाइजर के रूप में कार्य करते हुए विश्व कल्याण, मानवता और सतत विकास से जुड़े विषयों पर अपनी सलाह और अनुभव प्रदान कर रहे हैं।डॉ. कमल टावरी एक प्रख्यात लेखक भी हैं। उन्होंने अब तक लगभग 60 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिनमें राष्ट्र निर्माण, सुशासन, आध्यात्मिक चिंतन, सामाजिक विकास और आत्मनिर्भर भारत जैसे विषयों पर गहन विचार प्रस्तुत किए गए हैं।आज भी वे भारत और विश्व के विभिन्न मंचों पर सक्रिय रहकर किसानों, युवाओं और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास के अवसर पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।डॉ. कमल टावरी का जीवन इस बात का उदाहरण है कि सेवानिवृत्ति अंत नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए नई शुरुआत हो सकती है।अंत में उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे उनके संदेश को आत्मसात करें और एक समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।जय जवान , जय किसान।

ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर भारत के पक्षधर हैं पूर्व आईएएस डॉ. कमल टावरीन्यूज़ मैटर:पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. कमल टावरी देश में ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को मजबूत करने की बात करते हैं। उनका मानना है कि भारत की वास्तविक शक्ति गांवों में बसती है और ग्रामीण समाज के विकास से ही देश का समग्र विकास संभव है।डॉ. टावरी ने अपने प्रशासनिक अनुभव और सामाजिक कार्यों के माध्यम से समाज को जागरूक करने का प्रयास किया है। वे युवाओं को सकारात्मक सोच, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करते हैं।संन्यास ग्रहण करने के बाद स्वामी कमलानंद गिरि के रूप में भी वे समाज, पर्यावरण और ग्रामीण जागरण के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं।

आईएएस (सेवानिवृत्त) डॉ. कमल टावरी: सेना से प्रशासन और फिर अध्यात्म तक प्रेरणादायक सफरन्यूज़ मैटर:भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी डॉ. कमल टावरी का जीवन सेना, प्रशासन और आध्यात्मिक साधना का अनोखा संगम रहा है। उनका जन्म 1 अगस्त 1946 को महाराष्ट्र के वर्धा में हुआ। उन्होंने एलएलबी और अर्थशास्त्र में पीएचडी की शिक्षा प्राप्त की।डॉ. टावरी ने अपने करियर की शुरुआत भारतीय सेना से की और लगभग 6 वर्षों तक सेना में सेवा दी। इसके बाद वे 1968 बैच के आईएएस अधिकारी बने और उत्तर प्रदेश कैडर में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।लगभग 38 वर्षों की प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्होंने जिलाधिकारी, मंडलायुक्त, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव और केंद्र सरकार में योजना आयोग के सलाहकार जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले।सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने सामाजिक, बौद्धिक और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में कार्य जारी रखा। वर्ष 2022 में बद्रीनाथ धाम में संन्यास ग्रहण करने के बाद उनका नाम स्वामी कमलानंद गिरि हो गया। वर्तमान में वे आध्यात्मिक साधना, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण समाज जागरण में सक्रिय हैं।

शंकरगढ़ में हत्या का खुलासा, पुलिस ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तारप्रयागराज / भारत लाइव टीवी न्यूजप्रयागराज के शंकरगढ़ थाना क्षेत्र में हुई हत्या के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।जानकारी के अनुसार, 17 फरवरी को हुई वारदात के बाद शव को जंगल में फेंक दिया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू की और संदिग्धों से पूछताछ की।जांच के दौरान पुलिस को अहम सुराग मिले, जिसके आधार पर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और मामले से जुड़ी अन्य जानकारी भी जुटाई जा रही है।पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

बसही में होली मिलन समारोह में जुटे क्षेत्र के गणमान्य लोग, 55 वर्षों से चली आ रही परंपराबरही / भारत लाइव टीवी न्यूजबरही क्षेत्र में आयोजित होली मिलन समारोह में बड़ी संख्या में क्षेत्र के गणमान्य लोग और ग्रामीण शामिल हुए। इस कार्यक्रम में लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं और आपसी भाईचारे का संदेश दिया।बताया गया कि बरही में होली मिलन समारोह की यह परंपरा पिछले 55 वर्षों से लगातार चली आ रही है। हर वर्ष क्षेत्र के लोग एकत्र होकर इस आयोजन को बड़े उत्साह और सौहार्द के साथ मनाते हैं।कार्यक्रम के दौरान समाज के विभिन्न वर्गों के लोग मौजूद रहे और आपसी मेल-मिलाप के साथ क्षेत्र की सामाजिक एकता को मजबूत करने का संदेश दिया गया। उपस्थित लोगों ने इस परंपरा को आगे भी इसी तरह जारी रखने का संकल्प लिया।

क्राइम

शंकरगढ़ में हत्या का खुलासा, पुलिस ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तारप्रयागराज / भारत लाइव टीवी न्यूजप्रयागराज के शंकरगढ़ थाना क्षेत्र में हुई हत्या के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।जानकारी के अनुसार, 17 फरवरी को हुई वारदात के बाद शव को जंगल में फेंक दिया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू की और संदिग्धों से पूछताछ की।जांच के दौरान पुलिस को अहम सुराग मिले, जिसके आधार पर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और मामले से जुड़ी अन्य जानकारी भी जुटाई जा रही है।पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

खेल

लखनऊ। भारतीय किसान यूनियन आजाद हिंद संगठन के राष्ट्रीय संरक्षक एवं राष्ट्रीय सलाहकार, राज्य से लेकर पीएमओ तक सचिव रहे सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. कमल टावरी आज भारत के एक प्रख्यात प्रशासक, चिंतक और समाजसेवी के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने प्रशासनिक सेवा के साथ-साथ समाज और राष्ट्र निर्माण में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।1968 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रहे डॉ. कमल टावरी ने अपने लंबे प्रशासनिक जीवन में केंद्र और राज्य सरकार के अनेक महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने आराम का रास्ता नहीं चुना, बल्कि अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्रहित के लिए समर्पित कर दिया। उनका स्पष्ट उद्देश्य है — ग्राम स्वराज, आत्मनिर्भर भारत, स्वावलंबी समाज, सशक्त राष्ट्र और समृद्ध भारत का निर्माण।वर्तमान समय में डॉ. कमल टावरी भारतीय किसान यूनियन आजाद हिंद संगठन के राष्ट्रीय संरक्षक एवं राष्ट्रीय सलाहकार के रूप में किसानों, मजदूरों और वंचित वर्गों के हितों के लिए अपने अनुभव और मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।वे देशभर में किसानों, युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करते हैं और उन्हें कृषि, उद्यमिता, कौशल विकास, स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योग तथा स्वरोजगार के अनेक विकल्पों के बारे में जानकारी देते हैं।डॉ. कमल टावरी सहकारिता के माध्यम से समृद्धि के विचार को भी आगे बढ़ा रहे हैं। उनका मानना है कि सहकारिता के माध्यम से प्रत्येक ग्राम में आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है और ग्रामीणों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है।उनका स्पष्ट मानना है कि यदि गांव मजबूत होंगे तो भारत मजबूत होगा। इसी सोच के साथ वे लगातार ग्राम स्वराज की अवधारणा को मजबूत करने, किसानों को संगठित करने और युवाओं को रोजगार के नए अवसरों से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।इसके साथ ही वे शिक्षा और वैश्विक स्तर पर भी सक्रिय हैं। वे Panchgaon University, चेन्नई के वाइस चांसलर के रूप में शिक्षा, शोध और मूल्य आधारित ज्ञान को बढ़ावा दे रहे हैं।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। वे UNACCC में सीनियर एडवाइजर के रूप में कार्य करते हुए विश्व कल्याण, मानवता और सतत विकास से जुड़े विषयों पर अपनी सलाह और अनुभव प्रदान कर रहे हैं।डॉ. कमल टावरी एक प्रख्यात लेखक भी हैं। उन्होंने अब तक लगभग 60 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिनमें राष्ट्र निर्माण, सुशासन, आध्यात्मिक चिंतन, सामाजिक विकास और आत्मनिर्भर भारत जैसे विषयों पर गहन विचार प्रस्तुत किए गए हैं।आज भी वे भारत और विश्व के विभिन्न मंचों पर सक्रिय रहकर किसानों, युवाओं और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास के अवसर पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।डॉ. कमल टावरी का जीवन इस बात का उदाहरण है कि सेवानिवृत्ति अंत नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए नई शुरुआत हो सकती है।अंत में उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे उनके संदेश को आत्मसात करें और एक समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।जय जवान , जय किसान।

ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर भारत के पक्षधर हैं पूर्व आईएएस डॉ. कमल टावरीन्यूज़ मैटर:पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. कमल टावरी देश में ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को मजबूत करने की बात करते हैं। उनका मानना है कि भारत की वास्तविक शक्ति गांवों में बसती है और ग्रामीण समाज के विकास से ही देश का समग्र विकास संभव है।डॉ. टावरी ने अपने प्रशासनिक अनुभव और सामाजिक कार्यों के माध्यम से समाज को जागरूक करने का प्रयास किया है। वे युवाओं को सकारात्मक सोच, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करते हैं।संन्यास ग्रहण करने के बाद स्वामी कमलानंद गिरि के रूप में भी वे समाज, पर्यावरण और ग्रामीण जागरण के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं।

आईएएस (सेवानिवृत्त) डॉ. कमल टावरी: सेना से प्रशासन और फिर अध्यात्म तक प्रेरणादायक सफरन्यूज़ मैटर:भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी डॉ. कमल टावरी का जीवन सेना, प्रशासन और आध्यात्मिक साधना का अनोखा संगम रहा है। उनका जन्म 1 अगस्त 1946 को महाराष्ट्र के वर्धा में हुआ। उन्होंने एलएलबी और अर्थशास्त्र में पीएचडी की शिक्षा प्राप्त की।डॉ. टावरी ने अपने करियर की शुरुआत भारतीय सेना से की और लगभग 6 वर्षों तक सेना में सेवा दी। इसके बाद वे 1968 बैच के आईएएस अधिकारी बने और उत्तर प्रदेश कैडर में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।लगभग 38 वर्षों की प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्होंने जिलाधिकारी, मंडलायुक्त, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव और केंद्र सरकार में योजना आयोग के सलाहकार जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले।सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने सामाजिक, बौद्धिक और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में कार्य जारी रखा। वर्ष 2022 में बद्रीनाथ धाम में संन्यास ग्रहण करने के बाद उनका नाम स्वामी कमलानंद गिरि हो गया। वर्तमान में वे आध्यात्मिक साधना, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण समाज जागरण में सक्रिय हैं।

धर्म

लखनऊ। भारतीय किसान यूनियन आजाद हिंद संगठन के राष्ट्रीय संरक्षक एवं राष्ट्रीय सलाहकार, राज्य से लेकर पीएमओ तक सचिव रहे सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. कमल टावरी आज भारत के एक प्रख्यात प्रशासक, चिंतक और समाजसेवी के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने प्रशासनिक सेवा के साथ-साथ समाज और राष्ट्र निर्माण में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।1968 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रहे डॉ. कमल टावरी ने अपने लंबे प्रशासनिक जीवन में केंद्र और राज्य सरकार के अनेक महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने आराम का रास्ता नहीं चुना, बल्कि अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्रहित के लिए समर्पित कर दिया। उनका स्पष्ट उद्देश्य है — ग्राम स्वराज, आत्मनिर्भर भारत, स्वावलंबी समाज, सशक्त राष्ट्र और समृद्ध भारत का निर्माण।वर्तमान समय में डॉ. कमल टावरी भारतीय किसान यूनियन आजाद हिंद संगठन के राष्ट्रीय संरक्षक एवं राष्ट्रीय सलाहकार के रूप में किसानों, मजदूरों और वंचित वर्गों के हितों के लिए अपने अनुभव और मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।वे देशभर में किसानों, युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करते हैं और उन्हें कृषि, उद्यमिता, कौशल विकास, स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योग तथा स्वरोजगार के अनेक विकल्पों के बारे में जानकारी देते हैं।डॉ. कमल टावरी सहकारिता के माध्यम से समृद्धि के विचार को भी आगे बढ़ा रहे हैं। उनका मानना है कि सहकारिता के माध्यम से प्रत्येक ग्राम में आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है और ग्रामीणों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है।उनका स्पष्ट मानना है कि यदि गांव मजबूत होंगे तो भारत मजबूत होगा। इसी सोच के साथ वे लगातार ग्राम स्वराज की अवधारणा को मजबूत करने, किसानों को संगठित करने और युवाओं को रोजगार के नए अवसरों से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।इसके साथ ही वे शिक्षा और वैश्विक स्तर पर भी सक्रिय हैं। वे Panchgaon University, चेन्नई के वाइस चांसलर के रूप में शिक्षा, शोध और मूल्य आधारित ज्ञान को बढ़ावा दे रहे हैं।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। वे UNACCC में सीनियर एडवाइजर के रूप में कार्य करते हुए विश्व कल्याण, मानवता और सतत विकास से जुड़े विषयों पर अपनी सलाह और अनुभव प्रदान कर रहे हैं।डॉ. कमल टावरी एक प्रख्यात लेखक भी हैं। उन्होंने अब तक लगभग 60 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिनमें राष्ट्र निर्माण, सुशासन, आध्यात्मिक चिंतन, सामाजिक विकास और आत्मनिर्भर भारत जैसे विषयों पर गहन विचार प्रस्तुत किए गए हैं।आज भी वे भारत और विश्व के विभिन्न मंचों पर सक्रिय रहकर किसानों, युवाओं और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास के अवसर पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।डॉ. कमल टावरी का जीवन इस बात का उदाहरण है कि सेवानिवृत्ति अंत नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए नई शुरुआत हो सकती है।अंत में उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे उनके संदेश को आत्मसात करें और एक समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।जय जवान , जय किसान।

ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर भारत के पक्षधर हैं पूर्व आईएएस डॉ. कमल टावरीन्यूज़ मैटर:पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. कमल टावरी देश में ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को मजबूत करने की बात करते हैं। उनका मानना है कि भारत की वास्तविक शक्ति गांवों में बसती है और ग्रामीण समाज के विकास से ही देश का समग्र विकास संभव है।डॉ. टावरी ने अपने प्रशासनिक अनुभव और सामाजिक कार्यों के माध्यम से समाज को जागरूक करने का प्रयास किया है। वे युवाओं को सकारात्मक सोच, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करते हैं।संन्यास ग्रहण करने के बाद स्वामी कमलानंद गिरि के रूप में भी वे समाज, पर्यावरण और ग्रामीण जागरण के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं।

आईएएस (सेवानिवृत्त) डॉ. कमल टावरी: सेना से प्रशासन और फिर अध्यात्म तक प्रेरणादायक सफरन्यूज़ मैटर:भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी डॉ. कमल टावरी का जीवन सेना, प्रशासन और आध्यात्मिक साधना का अनोखा संगम रहा है। उनका जन्म 1 अगस्त 1946 को महाराष्ट्र के वर्धा में हुआ। उन्होंने एलएलबी और अर्थशास्त्र में पीएचडी की शिक्षा प्राप्त की।डॉ. टावरी ने अपने करियर की शुरुआत भारतीय सेना से की और लगभग 6 वर्षों तक सेना में सेवा दी। इसके बाद वे 1968 बैच के आईएएस अधिकारी बने और उत्तर प्रदेश कैडर में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।लगभग 38 वर्षों की प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्होंने जिलाधिकारी, मंडलायुक्त, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव और केंद्र सरकार में योजना आयोग के सलाहकार जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले।सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने सामाजिक, बौद्धिक और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में कार्य जारी रखा। वर्ष 2022 में बद्रीनाथ धाम में संन्यास ग्रहण करने के बाद उनका नाम स्वामी कमलानंद गिरि हो गया। वर्तमान में वे आध्यात्मिक साधना, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण समाज जागरण में सक्रिय हैं।

बसही में होली मिलन समारोह में जुटे क्षेत्र के गणमान्य लोग, 55 वर्षों से चली आ रही परंपराबरही / भारत लाइव टीवी न्यूजबरही क्षेत्र में आयोजित होली मिलन समारोह में बड़ी संख्या में क्षेत्र के गणमान्य लोग और ग्रामीण शामिल हुए। इस कार्यक्रम में लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं और आपसी भाईचारे का संदेश दिया।बताया गया कि बरही में होली मिलन समारोह की यह परंपरा पिछले 55 वर्षों से लगातार चली आ रही है। हर वर्ष क्षेत्र के लोग एकत्र होकर इस आयोजन को बड़े उत्साह और सौहार्द के साथ मनाते हैं।कार्यक्रम के दौरान समाज के विभिन्न वर्गों के लोग मौजूद रहे और आपसी मेल-मिलाप के साथ क्षेत्र की सामाजिक एकता को मजबूत करने का संदेश दिया गया। उपस्थित लोगों ने इस परंपरा को आगे भी इसी तरह जारी रखने का संकल्प लिया।

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लखनऊ। भारतीय किसान यूनियन आजाद हिंद संगठन के राष्ट्रीय संरक्षक एवं राष्ट्रीय सलाहकार, राज्य से लेकर पीएमओ तक सचिव रहे सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. कमल टावरी आज भारत के एक प्रख्यात प्रशासक, चिंतक और समाजसेवी के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने प्रशासनिक सेवा के साथ-साथ समाज और राष्ट्र निर्माण में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।1968 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रहे डॉ. कमल टावरी ने अपने लंबे प्रशासनिक जीवन में केंद्र और राज्य सरकार के अनेक महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने आराम का रास्ता नहीं चुना, बल्कि अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्रहित के लिए समर्पित कर दिया। उनका स्पष्ट उद्देश्य है — ग्राम स्वराज, आत्मनिर्भर भारत, स्वावलंबी समाज, सशक्त राष्ट्र और समृद्ध भारत का निर्माण।वर्तमान समय में डॉ. कमल टावरी भारतीय किसान यूनियन आजाद हिंद संगठन के राष्ट्रीय संरक्षक एवं राष्ट्रीय सलाहकार के रूप में किसानों, मजदूरों और वंचित वर्गों के हितों के लिए अपने अनुभव और मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।वे देशभर में किसानों, युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करते हैं और उन्हें कृषि, उद्यमिता, कौशल विकास, स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योग तथा स्वरोजगार के अनेक विकल्पों के बारे में जानकारी देते हैं।डॉ. कमल टावरी सहकारिता के माध्यम से समृद्धि के विचार को भी आगे बढ़ा रहे हैं। उनका मानना है कि सहकारिता के माध्यम से प्रत्येक ग्राम में आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है और ग्रामीणों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है।उनका स्पष्ट मानना है कि यदि गांव मजबूत होंगे तो भारत मजबूत होगा। इसी सोच के साथ वे लगातार ग्राम स्वराज की अवधारणा को मजबूत करने, किसानों को संगठित करने और युवाओं को रोजगार के नए अवसरों से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।इसके साथ ही वे शिक्षा और वैश्विक स्तर पर भी सक्रिय हैं। वे Panchgaon University, चेन्नई के वाइस चांसलर के रूप में शिक्षा, शोध और मूल्य आधारित ज्ञान को बढ़ावा दे रहे हैं।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। वे UNACCC में सीनियर एडवाइजर के रूप में कार्य करते हुए विश्व कल्याण, मानवता और सतत विकास से जुड़े विषयों पर अपनी सलाह और अनुभव प्रदान कर रहे हैं।डॉ. कमल टावरी एक प्रख्यात लेखक भी हैं। उन्होंने अब तक लगभग 60 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिनमें राष्ट्र निर्माण, सुशासन, आध्यात्मिक चिंतन, सामाजिक विकास और आत्मनिर्भर भारत जैसे विषयों पर गहन विचार प्रस्तुत किए गए हैं।आज भी वे भारत और विश्व के विभिन्न मंचों पर सक्रिय रहकर किसानों, युवाओं और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास के अवसर पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।डॉ. कमल टावरी का जीवन इस बात का उदाहरण है कि सेवानिवृत्ति अंत नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए नई शुरुआत हो सकती है।अंत में उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे उनके संदेश को आत्मसात करें और एक समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।जय जवान , जय किसान।

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लखनऊ। भारतीय किसान यूनियन आजाद हिंद संगठन के राष्ट्रीय संरक्षक एवं राष्ट्रीय सलाहकार, राज्य से लेकर पीएमओ तक सचिव रहे सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. कमल टावरी आज भारत के एक प्रख्यात प्रशासक, चिंतक और समाजसेवी के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने प्रशासनिक सेवा के साथ-साथ समाज और राष्ट्र निर्माण में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।1968 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रहे डॉ. कमल टावरी ने अपने लंबे प्रशासनिक जीवन में केंद्र और राज्य सरकार के अनेक महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने आराम का रास्ता नहीं चुना, बल्कि अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्रहित के लिए समर्पित कर दिया। उनका स्पष्ट उद्देश्य है — ग्राम स्वराज, आत्मनिर्भर भारत, स्वावलंबी समाज, सशक्त राष्ट्र और समृद्ध भारत का निर्माण।वर्तमान समय में डॉ. कमल टावरी भारतीय किसान यूनियन आजाद हिंद संगठन के राष्ट्रीय संरक्षक एवं राष्ट्रीय सलाहकार के रूप में किसानों, मजदूरों और वंचित वर्गों के हितों के लिए अपने अनुभव और मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।वे देशभर में किसानों, युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करते हैं और उन्हें कृषि, उद्यमिता, कौशल विकास, स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योग तथा स्वरोजगार के अनेक विकल्पों के बारे में जानकारी देते हैं।डॉ. कमल टावरी सहकारिता के माध्यम से समृद्धि के विचार को भी आगे बढ़ा रहे हैं। उनका मानना है कि सहकारिता के माध्यम से प्रत्येक ग्राम में आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है और ग्रामीणों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है।उनका स्पष्ट मानना है कि यदि गांव मजबूत होंगे तो भारत मजबूत होगा। इसी सोच के साथ वे लगातार ग्राम स्वराज की अवधारणा को मजबूत करने, किसानों को संगठित करने और युवाओं को रोजगार के नए अवसरों से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।इसके साथ ही वे शिक्षा और वैश्विक स्तर पर भी सक्रिय हैं। वे Panchgaon University, चेन्नई के वाइस चांसलर के रूप में शिक्षा, शोध और मूल्य आधारित ज्ञान को बढ़ावा दे रहे हैं।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। वे UNACCC में सीनियर एडवाइजर के रूप में कार्य करते हुए विश्व कल्याण, मानवता और सतत विकास से जुड़े विषयों पर अपनी सलाह और अनुभव प्रदान कर रहे हैं।डॉ. कमल टावरी एक प्रख्यात लेखक भी हैं। उन्होंने अब तक लगभग 60 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिनमें राष्ट्र निर्माण, सुशासन, आध्यात्मिक चिंतन, सामाजिक विकास और आत्मनिर्भर भारत जैसे विषयों पर गहन विचार प्रस्तुत किए गए हैं।आज भी वे भारत और विश्व के विभिन्न मंचों पर सक्रिय रहकर किसानों, युवाओं और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास के अवसर पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।डॉ. कमल टावरी का जीवन इस बात का उदाहरण है कि सेवानिवृत्ति अंत नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए नई शुरुआत हो सकती है।अंत में उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे उनके संदेश को आत्मसात करें और एक समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।जय जवान , जय किसान।

ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर भारत के पक्षधर हैं पूर्व आईएएस डॉ. कमल टावरीन्यूज़ मैटर:पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. कमल टावरी देश में ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को मजबूत करने की बात करते हैं। उनका मानना है कि भारत की वास्तविक शक्ति गांवों में बसती है और ग्रामीण समाज के विकास से ही देश का समग्र विकास संभव है।डॉ. टावरी ने अपने प्रशासनिक अनुभव और सामाजिक कार्यों के माध्यम से समाज को जागरूक करने का प्रयास किया है। वे युवाओं को सकारात्मक सोच, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करते हैं।संन्यास ग्रहण करने के बाद स्वामी कमलानंद गिरि के रूप में भी वे समाज, पर्यावरण और ग्रामीण जागरण के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं।

आईएएस (सेवानिवृत्त) डॉ. कमल टावरी: सेना से प्रशासन और फिर अध्यात्म तक प्रेरणादायक सफरन्यूज़ मैटर:भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी डॉ. कमल टावरी का जीवन सेना, प्रशासन और आध्यात्मिक साधना का अनोखा संगम रहा है। उनका जन्म 1 अगस्त 1946 को महाराष्ट्र के वर्धा में हुआ। उन्होंने एलएलबी और अर्थशास्त्र में पीएचडी की शिक्षा प्राप्त की।डॉ. टावरी ने अपने करियर की शुरुआत भारतीय सेना से की और लगभग 6 वर्षों तक सेना में सेवा दी। इसके बाद वे 1968 बैच के आईएएस अधिकारी बने और उत्तर प्रदेश कैडर में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।लगभग 38 वर्षों की प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्होंने जिलाधिकारी, मंडलायुक्त, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव और केंद्र सरकार में योजना आयोग के सलाहकार जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले।सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने सामाजिक, बौद्धिक और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में कार्य जारी रखा। वर्ष 2022 में बद्रीनाथ धाम में संन्यास ग्रहण करने के बाद उनका नाम स्वामी कमलानंद गिरि हो गया। वर्तमान में वे आध्यात्मिक साधना, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण समाज जागरण में सक्रिय हैं।

शंकरगढ़ में हत्या का खुलासा, पुलिस ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तारप्रयागराज / भारत लाइव टीवी न्यूजप्रयागराज के शंकरगढ़ थाना क्षेत्र में हुई हत्या के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।जानकारी के अनुसार, 17 फरवरी को हुई वारदात के बाद शव को जंगल में फेंक दिया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू की और संदिग्धों से पूछताछ की।जांच के दौरान पुलिस को अहम सुराग मिले, जिसके आधार पर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और मामले से जुड़ी अन्य जानकारी भी जुटाई जा रही है।पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

बसही में होली मिलन समारोह में जुटे क्षेत्र के गणमान्य लोग, 55 वर्षों से चली आ रही परंपराबरही / भारत लाइव टीवी न्यूजबरही क्षेत्र में आयोजित होली मिलन समारोह में बड़ी संख्या में क्षेत्र के गणमान्य लोग और ग्रामीण शामिल हुए। इस कार्यक्रम में लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं और आपसी भाईचारे का संदेश दिया।बताया गया कि बरही में होली मिलन समारोह की यह परंपरा पिछले 55 वर्षों से लगातार चली आ रही है। हर वर्ष क्षेत्र के लोग एकत्र होकर इस आयोजन को बड़े उत्साह और सौहार्द के साथ मनाते हैं।कार्यक्रम के दौरान समाज के विभिन्न वर्गों के लोग मौजूद रहे और आपसी मेल-मिलाप के साथ क्षेत्र की सामाजिक एकता को मजबूत करने का संदेश दिया गया। उपस्थित लोगों ने इस परंपरा को आगे भी इसी तरह जारी रखने का संकल्प लिया।