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1 thought on “लखनऊ। भारतीय किसान यूनियन आजाद हिंद संगठन के राष्ट्रीय संरक्षक एवं राष्ट्रीय सलाहकार, राज्य से लेकर पीएमओ तक सचिव रहे सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. कमल टावरी आज भारत के एक प्रख्यात प्रशासक, चिंतक और समाजसेवी के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने प्रशासनिक सेवा के साथ-साथ समाज और राष्ट्र निर्माण में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।1968 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रहे डॉ. कमल टावरी ने अपने लंबे प्रशासनिक जीवन में केंद्र और राज्य सरकार के अनेक महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने आराम का रास्ता नहीं चुना, बल्कि अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्रहित के लिए समर्पित कर दिया। उनका स्पष्ट उद्देश्य है — ग्राम स्वराज, आत्मनिर्भर भारत, स्वावलंबी समाज, सशक्त राष्ट्र और समृद्ध भारत का निर्माण।वर्तमान समय में डॉ. कमल टावरी भारतीय किसान यूनियन आजाद हिंद संगठन के राष्ट्रीय संरक्षक एवं राष्ट्रीय सलाहकार के रूप में किसानों, मजदूरों और वंचित वर्गों के हितों के लिए अपने अनुभव और मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।वे देशभर में किसानों, युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करते हैं और उन्हें कृषि, उद्यमिता, कौशल विकास, स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योग तथा स्वरोजगार के अनेक विकल्पों के बारे में जानकारी देते हैं।डॉ. कमल टावरी सहकारिता के माध्यम से समृद्धि के विचार को भी आगे बढ़ा रहे हैं। उनका मानना है कि सहकारिता के माध्यम से प्रत्येक ग्राम में आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है और ग्रामीणों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है।उनका स्पष्ट मानना है कि यदि गांव मजबूत होंगे तो भारत मजबूत होगा। इसी सोच के साथ वे लगातार ग्राम स्वराज की अवधारणा को मजबूत करने, किसानों को संगठित करने और युवाओं को रोजगार के नए अवसरों से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।इसके साथ ही वे शिक्षा और वैश्विक स्तर पर भी सक्रिय हैं। वे Panchgaon University, चेन्नई के वाइस चांसलर के रूप में शिक्षा, शोध और मूल्य आधारित ज्ञान को बढ़ावा दे रहे हैं।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। वे UNACCC में सीनियर एडवाइजर के रूप में कार्य करते हुए विश्व कल्याण, मानवता और सतत विकास से जुड़े विषयों पर अपनी सलाह और अनुभव प्रदान कर रहे हैं।डॉ. कमल टावरी एक प्रख्यात लेखक भी हैं। उन्होंने अब तक लगभग 60 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिनमें राष्ट्र निर्माण, सुशासन, आध्यात्मिक चिंतन, सामाजिक विकास और आत्मनिर्भर भारत जैसे विषयों पर गहन विचार प्रस्तुत किए गए हैं।आज भी वे भारत और विश्व के विभिन्न मंचों पर सक्रिय रहकर किसानों, युवाओं और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास के अवसर पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।डॉ. कमल टावरी का जीवन इस बात का उदाहरण है कि सेवानिवृत्ति अंत नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए नई शुरुआत हो सकती है।अंत में उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे उनके संदेश को आत्मसात करें और एक समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।जय जवान , जय किसान।”
जय हो राष्ट्रीय संरक्षक महोदय की